Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2019

पुराने साल की यादें और बात छोड़ देते है !

 रुतबा हैसियत और हसरत सब साथ छोड़ देते है पुराने साल की यादें और बात छोड़ देते है ! लोग नयें लोगों से मिलने को इतने बेताब रहते हैं भूल कर सब कुछ पुराने हाथ छोड़ देते हैं ! बर्फ की तरह अकड़ में चलने वालों गुस्से में हम लोगों के दाँत तोड़ देते हैं ! नए साल में लोग खुद को इस क़दर बदलना चाहते हैं जीवन भर कमाई अपनी औक़ात छोड़ देते हैं !  तुझे देने के लिए मेरे पास कुछ नहीं हैं बूढ़े दिसंबर जवाँ जनवरी से मिलने के लिए तेरे हिस्से में  ये रात छोड़ देते है ! नव वर्ष 2020 की बहुत बहुत शुभकामनाएँ ! संकल्प साग़र ग़ौर पुराने साल की यादें और बात छोड़ देते है !

दो चार बसें जला लेते हैं

संविधान के नाम पर थोड़ा मजा लेते है चलो चलकर दो चार बसें जला लेते है ! वो हमें देश से बाहर निकालना चाहते है चलो हाथों में पत्थर उठा लेते है ! वो हमसे सबूत मांगेंगे हमारे सही होने का  दो चार बसें जला लेते हैं भीड़ बनकर ख़ून की नदियाँ बहा लेते है ! मशवरा यही है की ना तुम जाओगे ना हम निकलेंगे एक एक कदम आहिस्ता आहिस्ता बढ़ा लेते है ! सियासत नहीं चाहती की हम कभी एक हो वो बहुत खुश है इन्हे लड़ा लेते है ! वो हमें लड़ने के लिए हमें ज़रूर उकसाएँगे चलो एक दूसरे को देने के लिए फ़ूल उठा लेते है ! मज़बूत दरख़्त खड़े रहते है आँधियों में भी तनकर छोटे पेड़ों को तो बच्चें भी हिला लेते है ! संकल्प साग़र ग़ौर  देश को मज़बूत बनाने पर ध्यान दे सरकारी संपत्ति पर हमारा बराबर अधिकार है! पुलिस पर पत्थर ना फेंके उन्हें भी दर्द होता है! मेरे भाइयों वो भी अपनी माँ के बच्चे है! संकल्प साग़र ग़ौर