एक तूफां दिल में ठहरा हुआ है मेरा दर्द वक़्त के साथ गहरा हुआ है । एक समंदर दिल में उफान पर है लेकिन हवा का आँचल आज भी लहरा हुआ है । बदलते वक़्त ने सोच के मायने बदल डाले लोग कहते है वक़्त सुनहरा हुआ है । अब चींखे भी कानो में असर नहीं करती न जाने कब से ये इंसान इतना बहरा हुआ है । उसकी पलक की झलक अब तलक है ज़ेहन (दिमाग ) में वो एहसास अभी तक दिल में ठहरा हुआ है । एक शख़्स है जो रोज़ मुझे ख़्वाबों में आकर चोट करता है एक अरसे बाद उसका अक़्स (परछाई ) बदलकर एक चेहरा हुआ है । सलाम करता हूँ में अपने देश के जाँबाज़ो (बहादुर ) को जिनकी वज़ह से तिरंगा अभी तक देश में फहरा (लहरा ) हुआ है । एक तूफां दिल में ठहरा हुआ है मेरा दर्द वक़्त के साथ गहरा हुआ है । लेख़क संकल्प साग़र ग़ौर ( बनाइये लफ़्ज़ों से दिल का रिश्ता )
लफ़्जो की छटपटाहट और अल्फाजों की जादूगरी का मजा लीजिए I संकल्प सागर की रचनायें (बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता )