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Showing posts from 2019

पुराने साल की यादें और बात छोड़ देते है !

 रुतबा हैसियत और हसरत सब साथ छोड़ देते है पुराने साल की यादें और बात छोड़ देते है ! लोग नयें लोगों से मिलने को इतने बेताब रहते हैं भूल कर सब कुछ पुराने हाथ छोड़ देते हैं ! बर्फ की तरह अकड़ में चलने वालों गुस्से में हम लोगों के दाँत तोड़ देते हैं ! नए साल में लोग खुद को इस क़दर बदलना चाहते हैं जीवन भर कमाई अपनी औक़ात छोड़ देते हैं !  तुझे देने के लिए मेरे पास कुछ नहीं हैं बूढ़े दिसंबर जवाँ जनवरी से मिलने के लिए तेरे हिस्से में  ये रात छोड़ देते है ! नव वर्ष 2020 की बहुत बहुत शुभकामनाएँ ! संकल्प साग़र ग़ौर पुराने साल की यादें और बात छोड़ देते है !

दो चार बसें जला लेते हैं

संविधान के नाम पर थोड़ा मजा लेते है चलो चलकर दो चार बसें जला लेते है ! वो हमें देश से बाहर निकालना चाहते है चलो हाथों में पत्थर उठा लेते है ! वो हमसे सबूत मांगेंगे हमारे सही होने का  दो चार बसें जला लेते हैं भीड़ बनकर ख़ून की नदियाँ बहा लेते है ! मशवरा यही है की ना तुम जाओगे ना हम निकलेंगे एक एक कदम आहिस्ता आहिस्ता बढ़ा लेते है ! सियासत नहीं चाहती की हम कभी एक हो वो बहुत खुश है इन्हे लड़ा लेते है ! वो हमें लड़ने के लिए हमें ज़रूर उकसाएँगे चलो एक दूसरे को देने के लिए फ़ूल उठा लेते है ! मज़बूत दरख़्त खड़े रहते है आँधियों में भी तनकर छोटे पेड़ों को तो बच्चें भी हिला लेते है ! संकल्प साग़र ग़ौर  देश को मज़बूत बनाने पर ध्यान दे सरकारी संपत्ति पर हमारा बराबर अधिकार है! पुलिस पर पत्थर ना फेंके उन्हें भी दर्द होता है! मेरे भाइयों वो भी अपनी माँ के बच्चे है! संकल्प साग़र ग़ौर

एक तूफां दिल में ठहरा हुआ है ।

एक तूफां दिल में ठहरा हुआ है मेरा दर्द वक़्त के साथ गहरा हुआ है  । एक समंदर दिल में उफान पर है लेकिन हवा का आँचल आज भी लहरा हुआ है  । बदलते वक़्त ने सोच के मायने बदल डाले लोग कहते है वक़्त सुनहरा हुआ है  । अब चींखे भी कानो में असर नहीं करती न जाने कब से ये इंसान इतना बहरा हुआ है  । उसकी पलक की झलक अब तलक है  ज़ेहन (दिमाग ) में वो एहसास अभी तक दिल में ठहरा हुआ है  । एक शख़्स है जो रोज़ मुझे ख़्वाबों में आकर चोट  करता है एक अरसे बाद उसका अक़्स (परछाई ) बदलकर एक चेहरा हुआ है  । सलाम करता हूँ में अपने देश के जाँबाज़ो (बहादुर ) को जिनकी वज़ह से तिरंगा अभी तक देश में फहरा (लहरा ) हुआ है  । एक तूफां दिल में ठहरा हुआ है मेरा दर्द वक़्त के साथ गहरा हुआ है  । लेख़क संकल्प साग़र ग़ौर ( बनाइये लफ़्ज़ों से दिल का रिश्ता )

कोई बदले न बदलें ख़ुद को बदल लेना चाहिए !

कोई बदले न बदलें ख़ुद को बदल लेना चाहिए थोड़ी देर बिना मतलब के भी चल लेना चाहिए ! सूरज की तरह तो हर कोई निकलना चाहता है रात की तरह  भी ढल लेना चाहिए ! मंजिलो को तो हर कोई पाना चाहता है थोड़ी देर रास्तों पर भी चल लेना चाहिए ! जब ख़ुदा की रेहमत बरसती नहीं है सुबह उठकर सूरज को जल देना चाहिए ! सुना है वो लहरों पर बैठकर पार जाना चाहता है उसे समंदर के किनारे घर लेना चाहिए ! जीने की कोशिशें तो सभी करतें हैं वक़्त मिले तो किसी पर मर लेना चाहिए ! कोई बदले न बदलें ख़ुद को बदल लेना चाहिए थोड़ी देर बिना मतलब के भी चल लेना चाहिए ! लेख़क संकल्प साग़र ग़ौर ( बनाइयें लफ़्ज़ों से दिल का रिश्ता ) कोई बदले न बदलें ख़ुद को बदल लेना चाहिए !

अब लोग खुल कर बाहर आते नहीं हैं

अब लोग खुल कर बाहर आते नहीं हैं अब लोग खुल कर बाहर आतें नहीं हैं बात कितनी भी संजीदा (गंभीर ) हो बताते नहीं हैं  । सारी बातें कर लेते है बाहर के लोगों से घर के लोग उन्हें नजर आते नहीं हैं  । अपना हिस्सा लेने में लोग जरा भी शर्म नहीं करते खुद को अगर देना हो तो महीनों तक नजर आते नहीं हैं   । दूसरों को सब मशवरा (सलाह ) देते है सोच बदलने का फ़क़त (केवल ) अपनी सोच बदल पातें नहीं हैं  । लोग बड़ी बड़ी बातें करते है जंग जीतने की जरा सी सर्दी हो जायें तो रजाई से  बहार आतें नहीं हैं   । माँ बाप सारी दौलत लगा देते है बच्चों की परवरिश में बच्चें  पाई पाई का हिसाब देने में भी हिचकिचातें नहीं हैं   । दोस्ती निभाने वालो की अब कमी सी लगती है लेकिन दुश्मनी में लोग कमी दिखातें नहीं हैं   । जो लोग दूसरों के रास्तें बंद करते है मंजिलों तक वो भी कभी पहुँच पातें नहीं हैं  । अब लोग खुल कर बाहर आते नहीं है बात कितनी भी संजीदा हो बताते नहीं हैं ।   लेख़क  संकल्प साग़र गौर (बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता )...

दिल के राजो को यूँ छुपाते नहीं है

माना कि दिल के राजो को यूँ छुपाते नहीं है लेकिन इतना खुल कर भी किसी के सामने आते नहीं है  । सुना है उसे अपनी धड़कनो पर ऐतबार (भरोसा )बहुत है लेकिन दिल के दरवाजे लोग बेवजह खटखटाते नहीं है  । हालत ये है की मुराद(प्रार्थना ) अगर पूरी न हो मंदिर में भी लोग फूल चढ़ाते नहीं है  । मोहब्बत में अक्सर निगाहों से बात होती है फिजूल में लोग होटों को हिलाते नहीं है  । उम्र भर लोग मंजिलो कि राह तकते है रास्ते किसी को नजर आते नहीं है  । जो दूसरों के घरों में आग लगाते है सच यही है कि वो कभी चैन से सो पाते नहीं है  । दिल के राजो को यूँ छुपाते नहीं है लेकिन इतना खुल कर भी किसी के सामने आते नहीं है  ।  संकल्प साग़र गौर (बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता ) 

एहसासों के दायरे बदल के देखता हूँ !

अपने एहसासों के दायरे बदल के देखता हूँ सूरज की तरह में भी ढल के देखता हूँ , मुसाफिर हूँ यारो इसलिए सपने मै भी सफर के देखता हूँ , एहसासों के दायरे बदल के देखता हूँ ! एक चेहरा है जो मेरे एहसासों मै दफ़न हो गया है , तस्वीरों को रोज न जाने क्यों बदल के देखता हूँ , सुना है इसी गली मै रहता है वो अफसाना मेरा , क्या पता मुक्कमल हो जाये आरजू मेरी कुछ दूर इस तरफ चल के देखता हूँ , अपने एहसासों के दायरे बदल के देखता हूँ सूरज की तरह में भी ढल के देखता हूँ मुसाफिर हूँ यारो इसलिए सपने मै भी सफर के देखता हूँ !      लेखक संकल्प साग़र गौर (बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता ) 

एक सोच सोच रही है (Power of your thoughts or thinking)

एक सोच  एक सोच.......... सोच रही है , एक सोच .......... नोच रही है , एक सोच इंतज़ार कर रही है , एक सोच प्यार कर रही है , एक सोच, सोच को बेकार कर रही है , एक सोच हमें समझदार कर रही है , एक सोच इंकार कर रही है , एक सोच हम पर राज कर रही है , एक सोच अटकी हुई है , एक सोच भटकी हुई है , एक सोच विचारो में है , एक सोच विकारो में है , एक सोच भ्रम में है , एक सोच क्रम में है , इस सोच के क्रम को घटाओ मत , इस सोच को निचले क्रम पर लाओ मत, ये सोच महानता की सीढ़ी है  ये सोच आपकी आने वाली पीढ़ी है  । आपकी सोच बेहतर बने और आप अपनी सोच से दूसरो को बेहतर बनने के लिए प्रेरित करें  ।           लेखक  संकल्प साग़र गौर (बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता )