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Showing posts from April, 2020

7. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. समझ ही नहीं आता तेरी तस्वीर है या दरिया जब भी देखता हूँ बहता चला जाता हूँ ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे ख़्वाब समझ कर अपने से जुदा ना करना अगर रूह में उतर गये तो मर के ही निकलेंगे ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. अश्क़ों के मोती धीरे धीरे पिरोते हैं ये ख़्वाब भी कितने अज़ीब होते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

6. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. सम्मान भी कितना अज़ीब है अपना हर कोई बढ़ाना चाहता है और दूसरे का घटाना ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. परिंदे भी दूर तक उड़ान ले गये आप तो झलक दिखला कर हमारी जान ले गये ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. कुछ लोग हमें ज़हर समझते थे ढूढ़ने पर हम पूरा शहर निकले ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

5. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. कुछ लोग अपनी कहानी को ख़ून से लिखतें हैं हम शायर हैं हर अलफ़ाज़ को पूरे जोश ए ज़ुनून से लिखतें हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. कुछ लोग पहले मैं फ़िर तुम और फ़िर आप हो गए और फ़िर आस्तीन में घुस कर आस्तीन के साँप हो गए ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. रात के आग़ोश में खो जाते हैं वक़्त बेहतरीन हैं चलो एक दूसरे के हो जाते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

4. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. कहने से वो डरता बहुत है लेकिन सच में वो मुझ पर मरता बहुत है ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. ज़रूरत से ज़्यादा हर चीज़ का ख़्याल करतें हैं इसलिए लोग हमसे ज्यादा सवाल करतें हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. कुछ लोग पहले आँखें चार करते हैं और फ़िर हवस का क़ारोबार करते हैं ! ये सच है ठोकर उन्हीं के हिस्सें में आती हैं जो सच्चा प्यार करते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

3. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. दो क़दम तुम्हारे साथ चलना चाहते हैं तुम्हारे इश्क में ढलना चाहते हैं सुना हैं तुम मदहोश करती हो एक बार हम भी गिर के संभलना चाहते हैं !! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. चलो तन्हाई के दरवाज़े तोड़ देते हैं कुछ देर के लिए ख़ुद को खुला छोड़ देते हैं  ! वक़्त कठिन है दिल का भार कम करतें हैं तुम्हारा ख़्याल कुछ दिन छोड़ देते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. दिल की धड़कनों पर ऐतबार क्या करतें तुम्हारा शक दूर करतें तो प्यार क्या करतें ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

2. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. एक ख़्वाब था आँखों में वो भी तोड़ दिया तुमने हम हमसफ़र की तलाश में निकलें थे फ़िर से तन्हा छोड़ दिया तुमने ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे कहाँ पता था सफ़र में बात नहीं होगी तुम हर लम्हा साथ होगी मग़र मुलाक़ात नही होगी ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. मैं दर्द हूँ मुझे समझना नहीं सहना पड़ता है अश्क़ चाहकर भी पत्थर नहीं हो सकते इन्हें आँखों से बहना पड़ता है ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

1. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

# 1.  ख़्वाहिशें भी कितनी अज़ीब हैं दिल में रहकर दिल को ही ठगती रहती हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर # 2. फ़क़त अश्क़ों के बह जाने से दिल हल्का नहीं होता ख़ुद को वक़्त रहते संभाल लेता मैं अगर ये ग़म उम्र भर का नहीं होता !! # संकल्प साग़र ग़ौर # 3. मोमबत्ती को अपने हाथों से बुझाने लगे हैं अँधेरे अब हमारे ज़ेहन में समाने लगे हैं ! हम सच्चे हैं इसलिए कोई हाथ बढ़ाता नहीं हैं झूठों को अब लोग अपने गले लगाने लगे हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर