Skip to main content

3. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1.
दो क़दम तुम्हारे साथ चलना चाहते हैं
तुम्हारे इश्क में ढलना चाहते हैं
सुना हैं तुम मदहोश करती हो
एक बार हम भी गिर के संभलना चाहते हैं !!
# संकल्प साग़र ग़ौर
2.
चलो तन्हाई के दरवाज़े तोड़ देते हैं
कुछ देर के लिए ख़ुद को खुला छोड़ देते हैं  !
वक़्त कठिन है दिल का भार कम करतें हैं
तुम्हारा ख़्याल कुछ दिन छोड़ देते हैं !
# संकल्प साग़र ग़ौर
3.
दिल की धड़कनों पर
ऐतबार क्या करतें
तुम्हारा शक दूर करतें
तो प्यार क्या करतें !
# संकल्प साग़र ग़ौर 

Comments

Popular posts from this blog

7. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. समझ ही नहीं आता तेरी तस्वीर है या दरिया जब भी देखता हूँ बहता चला जाता हूँ ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे ख़्वाब समझ कर अपने से जुदा ना करना अगर रूह में उतर गये तो मर के ही निकलेंगे ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. अश्क़ों के मोती धीरे धीरे पिरोते हैं ये ख़्वाब भी कितने अज़ीब होते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर