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2. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1.
एक ख़्वाब था आँखों में
वो भी तोड़ दिया तुमने
हम हमसफ़र की
तलाश में निकलें थे
फ़िर से
तन्हा छोड़ दिया तुमने !
# संकल्प साग़र ग़ौर
2.
मुझे कहाँ पता था
सफ़र में बात नहीं होगी
तुम हर लम्हा साथ होगी
मग़र मुलाक़ात नही होगी !
# संकल्प साग़र ग़ौर
3.
मैं दर्द हूँ
मुझे समझना नहीं
सहना पड़ता है
अश्क़ चाहकर भी
पत्थर नहीं हो सकते
इन्हें आँखों से
बहना पड़ता है !
# संकल्प साग़र ग़ौर 

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1. समझ ही नहीं आता तेरी तस्वीर है या दरिया जब भी देखता हूँ बहता चला जाता हूँ ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे ख़्वाब समझ कर अपने से जुदा ना करना अगर रूह में उतर गये तो मर के ही निकलेंगे ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. अश्क़ों के मोती धीरे धीरे पिरोते हैं ये ख़्वाब भी कितने अज़ीब होते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर