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7. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1.
समझ ही नहीं आता
तेरी तस्वीर है या दरिया
जब भी देखता हूँ
बहता चला जाता हूँ !
# संकल्प साग़र ग़ौर
2.
मुझे ख़्वाब समझ कर
अपने से जुदा ना करना
अगर रूह में उतर गये
तो मर के ही निकलेंगे !
# संकल्प साग़र ग़ौर
3.
अश्क़ों के मोती
धीरे धीरे पिरोते हैं
ये ख़्वाब भी
कितने अज़ीब होते हैं !
# संकल्प साग़र ग़ौर 

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