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Showing posts from March, 2020

पुराने घावों को भरने में ज़माने लगते हैं !

जो लोग रोशनी में नहाने लगते हैं अक़्सर वही लोग अँधेरों से घबराने लगते हैं !! जो लोग अपने झूठ में खोए रहते हैं उन्हें दूसरों के सच बहाने लगते हैं !!! पुराने घावों को क्यूँ कुरेदते हो तुम्हें कैसे बताएँ ज़नाब इन्हें भरने में ज़माने लगते हैं !!!! # संकल्प साग़र ग़ौर

बुरा ना मानों होली है !

न सोच बची न सच्चाई है अब दिखती नहीं कोई  अच्छाई है , रंग , गुलाल अब तीखे है मिठाई के रंग भी फीके है , प्यार भरी वो बात नहीं है तीखी सबकी बोली है बुरा ना मानों होली है !! हर चौराहे पर झगड़ा है किसने किसको रगड़ा है , उसको रंग नहीं लगाना भैया जो हमसे तगड़ा है हर गली लफंगों की घूमती रहती टोली है बुरा ना मानों होली है !!  न मान बचा न मर्यादा हर कोई समझें ख़ुद को ज़्यादा हाथ में बोतल मुँह में गाली गंदी कितनी बोली है बुरा ना मानों होली है !! बुरा ना मानों होली है !! संकल्प साग़र गौर (बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )