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बुरा ना मानों होली है !

न सोच बची न सच्चाई है
अब दिखती नहीं कोई  अच्छाई है ,
रंग , गुलाल अब तीखे है
मिठाई के रंग भी फीके है ,
प्यार भरी वो बात नहीं है
तीखी सबकी बोली है
बुरा ना मानों होली है !!
हर चौराहे पर झगड़ा है
किसने किसको रगड़ा है ,
उसको रंग नहीं लगाना भैया
जो हमसे तगड़ा है
हर गली लफंगों की
घूमती रहती टोली है
बुरा ना मानों होली है !!
 न मान बचा न मर्यादा
हर कोई समझें ख़ुद को ज़्यादा
हाथ में बोतल मुँह में गाली
गंदी कितनी बोली है
बुरा ना मानों होली है !!
बुरा ना मानों होली है !!
संकल्प साग़र गौर
(बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

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