1. समझ ही नहीं आता तेरी तस्वीर है या दरिया जब भी देखता हूँ बहता चला जाता हूँ ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे ख़्वाब समझ कर अपने से जुदा ना करना अगर रूह में उतर गये तो मर के ही निकलेंगे ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. अश्क़ों के मोती धीरे धीरे पिरोते हैं ये ख़्वाब भी कितने अज़ीब होते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर
1. सम्मान भी कितना अज़ीब है अपना हर कोई बढ़ाना चाहता है और दूसरे का घटाना ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. परिंदे भी दूर तक उड़ान ले गये आप तो झलक दिखला कर हमारी जान ले गये ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. कुछ लोग हमें ज़हर समझते थे ढूढ़ने पर हम पूरा शहर निकले ! # संकल्प साग़र ग़ौर