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6. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1.
सम्मान भी कितना
अज़ीब है
अपना हर कोई
बढ़ाना चाहता है
और दूसरे का घटाना !
# संकल्प साग़र ग़ौर
2.
परिंदे भी दूर तक
उड़ान ले गये
आप तो झलक दिखला
कर हमारी जान ले गये !
# संकल्प साग़र ग़ौर
3.
कुछ लोग हमें
ज़हर समझते थे
ढूढ़ने पर हम
पूरा शहर निकले !
# संकल्प साग़र ग़ौर 

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1. समझ ही नहीं आता तेरी तस्वीर है या दरिया जब भी देखता हूँ बहता चला जाता हूँ ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे ख़्वाब समझ कर अपने से जुदा ना करना अगर रूह में उतर गये तो मर के ही निकलेंगे ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. अश्क़ों के मोती धीरे धीरे पिरोते हैं ये ख़्वाब भी कितने अज़ीब होते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर