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1. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

# 1.
 ख़्वाहिशें भी कितनी
अज़ीब हैं
दिल में रहकर
दिल को ही
ठगती रहती हैं !
# संकल्प साग़र ग़ौर

# 2.
फ़क़त अश्क़ों के बह जाने से
दिल हल्का नहीं होता
ख़ुद को वक़्त रहते
संभाल लेता मैं
अगर ये ग़म उम्र भर
का नहीं होता !!
# संकल्प साग़र ग़ौर

# 3.
मोमबत्ती को अपने हाथों से बुझाने लगे हैं
अँधेरे अब हमारे ज़ेहन में समाने लगे हैं !
हम सच्चे हैं इसलिए कोई हाथ बढ़ाता नहीं हैं
झूठों को अब लोग अपने गले लगाने लगे हैं !
# संकल्प साग़र ग़ौर 

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1. समझ ही नहीं आता तेरी तस्वीर है या दरिया जब भी देखता हूँ बहता चला जाता हूँ ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे ख़्वाब समझ कर अपने से जुदा ना करना अगर रूह में उतर गये तो मर के ही निकलेंगे ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. अश्क़ों के मोती धीरे धीरे पिरोते हैं ये ख़्वाब भी कितने अज़ीब होते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर