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Showing posts from 2020

7. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. समझ ही नहीं आता तेरी तस्वीर है या दरिया जब भी देखता हूँ बहता चला जाता हूँ ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे ख़्वाब समझ कर अपने से जुदा ना करना अगर रूह में उतर गये तो मर के ही निकलेंगे ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. अश्क़ों के मोती धीरे धीरे पिरोते हैं ये ख़्वाब भी कितने अज़ीब होते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

6. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. सम्मान भी कितना अज़ीब है अपना हर कोई बढ़ाना चाहता है और दूसरे का घटाना ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. परिंदे भी दूर तक उड़ान ले गये आप तो झलक दिखला कर हमारी जान ले गये ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. कुछ लोग हमें ज़हर समझते थे ढूढ़ने पर हम पूरा शहर निकले ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

5. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. कुछ लोग अपनी कहानी को ख़ून से लिखतें हैं हम शायर हैं हर अलफ़ाज़ को पूरे जोश ए ज़ुनून से लिखतें हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. कुछ लोग पहले मैं फ़िर तुम और फ़िर आप हो गए और फ़िर आस्तीन में घुस कर आस्तीन के साँप हो गए ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. रात के आग़ोश में खो जाते हैं वक़्त बेहतरीन हैं चलो एक दूसरे के हो जाते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

4. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. कहने से वो डरता बहुत है लेकिन सच में वो मुझ पर मरता बहुत है ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. ज़रूरत से ज़्यादा हर चीज़ का ख़्याल करतें हैं इसलिए लोग हमसे ज्यादा सवाल करतें हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. कुछ लोग पहले आँखें चार करते हैं और फ़िर हवस का क़ारोबार करते हैं ! ये सच है ठोकर उन्हीं के हिस्सें में आती हैं जो सच्चा प्यार करते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

3. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. दो क़दम तुम्हारे साथ चलना चाहते हैं तुम्हारे इश्क में ढलना चाहते हैं सुना हैं तुम मदहोश करती हो एक बार हम भी गिर के संभलना चाहते हैं !! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. चलो तन्हाई के दरवाज़े तोड़ देते हैं कुछ देर के लिए ख़ुद को खुला छोड़ देते हैं  ! वक़्त कठिन है दिल का भार कम करतें हैं तुम्हारा ख़्याल कुछ दिन छोड़ देते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. दिल की धड़कनों पर ऐतबार क्या करतें तुम्हारा शक दूर करतें तो प्यार क्या करतें ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

2. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. एक ख़्वाब था आँखों में वो भी तोड़ दिया तुमने हम हमसफ़र की तलाश में निकलें थे फ़िर से तन्हा छोड़ दिया तुमने ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे कहाँ पता था सफ़र में बात नहीं होगी तुम हर लम्हा साथ होगी मग़र मुलाक़ात नही होगी ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. मैं दर्द हूँ मुझे समझना नहीं सहना पड़ता है अश्क़ चाहकर भी पत्थर नहीं हो सकते इन्हें आँखों से बहना पड़ता है ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

1. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

# 1.  ख़्वाहिशें भी कितनी अज़ीब हैं दिल में रहकर दिल को ही ठगती रहती हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर # 2. फ़क़त अश्क़ों के बह जाने से दिल हल्का नहीं होता ख़ुद को वक़्त रहते संभाल लेता मैं अगर ये ग़म उम्र भर का नहीं होता !! # संकल्प साग़र ग़ौर # 3. मोमबत्ती को अपने हाथों से बुझाने लगे हैं अँधेरे अब हमारे ज़ेहन में समाने लगे हैं ! हम सच्चे हैं इसलिए कोई हाथ बढ़ाता नहीं हैं झूठों को अब लोग अपने गले लगाने लगे हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर 

पुराने घावों को भरने में ज़माने लगते हैं !

जो लोग रोशनी में नहाने लगते हैं अक़्सर वही लोग अँधेरों से घबराने लगते हैं !! जो लोग अपने झूठ में खोए रहते हैं उन्हें दूसरों के सच बहाने लगते हैं !!! पुराने घावों को क्यूँ कुरेदते हो तुम्हें कैसे बताएँ ज़नाब इन्हें भरने में ज़माने लगते हैं !!!! # संकल्प साग़र ग़ौर

बुरा ना मानों होली है !

न सोच बची न सच्चाई है अब दिखती नहीं कोई  अच्छाई है , रंग , गुलाल अब तीखे है मिठाई के रंग भी फीके है , प्यार भरी वो बात नहीं है तीखी सबकी बोली है बुरा ना मानों होली है !! हर चौराहे पर झगड़ा है किसने किसको रगड़ा है , उसको रंग नहीं लगाना भैया जो हमसे तगड़ा है हर गली लफंगों की घूमती रहती टोली है बुरा ना मानों होली है !!  न मान बचा न मर्यादा हर कोई समझें ख़ुद को ज़्यादा हाथ में बोतल मुँह में गाली गंदी कितनी बोली है बुरा ना मानों होली है !! बुरा ना मानों होली है !! संकल्प साग़र गौर (बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

आजकल ज़्यादातर लोग ग़लत नाव में सवार बैठें हैं !

आजकल ज़्यादातर लोग ग़लत नाव में सवार बैठें है कहते है मोदी सरकार की वज़ह से बेरोजगार बैठें हैं! संघर्ष करने की ताक़त नहीं रखते हैं  ज़िन्दगी से लड़े बिना ही हार बैठे हैं ! सभी माँ बाप बच्चों के लिए जीतें हैं अपनी इच्छाएँ तो वो कब की मार बैठें है ! रास्तों का पता लोगों को उम्र भर नहीं चलता लेकिन मंज़िलों को पाने के लिए सब बेक़रार बैठें है ! पैसा कमाने की दौड़ में सभी लोग लगे हुए हैं नादान हैं उम्र भर ज़िंदा रहने की ग़लतफ़हमी पाल बैठें हैं ! संकल्प साग़र ग़ौर (बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

दिल्ली जल रही है सियासत चल रही है !

दिल्ली जल रही है सियासत चल रही है बुराई अच्छाई की छाती पर मूँग दल रही है ! किराये के टटटू और भाडे के गुंडे गोलियाँ कैसे खुले आम चल रही है ! टायरों में आग लगाना और चक्का जाम करना ऐसी ख्वाइशें सबके दिलों में पल रही है ! कौन पूछे सवाल और कौन माँगे सबूत सरकार तो सिर्फ ऑंखें मल रही है ! थोड़ा सा गुस्से में हूँ थोड़ा सा ख़ामोश मैं भी हूँ बैचैनी अजीब सी मेरे दिल में भी चल रही है ! जब आज ये हाल है तो कल कितना बदतर होगा संकल्प ज़िन्दगी लगता है रोज मौत की तरफ एक एक क़दम बढ़ रही है ! दिल्ली जल रही है सियासत चल रही है     बुराई अच्छाई की छाती पर मूँग दल रही है ! संकल्प साग़र ग़ौर ( बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

कोई बदले न बदले खुद को बदल लेना चाहिए !

कोई बदले न बदले खुद को बदल लेना चाहिए  कोई बदले न बदले खुद को बदल लेना चाहिए ! थोड़ी देर बिना मतलब के भी चल लेना चाहिए ! सूरज की तरह तो हर कोई निकलना चाहता है रात की तरह  भी ढल लेना चाहिए ! जब ख़ुदा की रहमत बरसती नहीं है सुबह उठकर सूरज को जल देना चाहिए ! सुना है वो लहरों पर बैठकर पार जाना चाहता है उसे समंदर के किनारे घर लेना चाहिए ! संकल्प साग़र ग़ौर (बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

भीगी हुई आँखों में एक सैलाब बाकी है !

भीगी हुई आँखों में एक सैलाब बाकी है दिन तो ढल गया रात बाकी है ! कहने के लिए कुछ नहीं है लेकिन फिर भी एक बात बाकी है ! यूँ तो मिलता रहा हूँ बरसो से तुमसे लेकिन अभी एक अधूरी मुलाकात बाकी है ! तेरी जुस्तजू के सहारे जी तो लूँ तुझे देने के लिए एक हसरतो का गुलाब बाकी है ! तू मुझमें है में तुझमें हूँ लेकिन नजर नहीं आता ये तेरा हुनर है या मेरी चालाकी है  कुछ तो बाकी है ........................................... कुछ तो बाकी है ! संकल्प साग़र ग़ौर (बनाइयें लफ़्ज़ों से दिल का रिश्ता )

कुछ लोग क़िस्मत को आज़माना छोड़ देते है!

कुछ लोग क़िस्मत को आज़माना छोड़ देते है ये कहकर की हम अकेले है कमाना छोड़ देते है ! कभी कभी लोगों की एक मुराद पूरी नहीं होती गुस्से में आकर मंदिर जाना छोड़ देते है ! आजकल के बच्चें ग़लतियों को सुधारतें नहीं है माँ बाप के हिस्सें में अपनी ग़लतियों का हर्ज़ाना छोड़ देते है ! कुछ लोग किसी को यादों को भूल जाने में वक़्त नहीं लगातें कुछ लोग किसी की याद में खाना छोड़ देते है ! एक हम है संकल्प जो रोज़ ठोकरें खाकर भी जिंदादिल है वरना लोग तो ज़रा ज़रा सी बातों पर मुस्कुराना छोड़ देते है ! संकल्प साग़र ग़ौर (बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

ख़ामोश रहने से सवाल हल नहीं होता !

खामोश रहने से सवाल हल नहीं होता लोगों की तरह सोचने से जीवन सफल नहीं होता जीवन से वही डरते हैं जिनकी भुजाओ में बल नहीं होता , सच्ची बातों पर लोगों का कोई अमल नहीं होता , कीचड में नहीं खिलता अगर वो फूल तो उसका नाम कमल नहीं होता I संकल्प साग़र ग़ौर (बनाइयें लफ़्जो से दिल का रिश्ता ) ख़ामोश रहने से सवाल हल नहीं होता !

नज़रों से नजरें मिलती रहती है !

नज़रो से नज़रे मिलती रहती है दिल की कलियाँ रोज खिलती रहती है हवाएँ आँधियों का रूप ले रही हैं रोशनी तो रोज सूरज से मिलती रहती है कोई तो है जो अंधेरो के नुमाइश कर रहा है लगता है रोशनी अंधेरो को घूरती रहती है गुनाह करने वालो का वजूद बस इतना है खुराफात वहाँ भी करते है जहाँ भगवान की मूर्ति रहती है संकल्प साग़र ग़ौर (बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता ) नज़रों से नजरें मिलती रहती है !

बेमतलब सी कविता ज़रूरी तो नहीं !

 सुनसान सड़क अकेली रात और मैं चारों तरफ़ सन्नाटा अचानक मम्मी की कॉल और वो कह रही है साथ लेते आना दो किलों आटा कितनी अज़ीब बात लगती है हर बात ज़रूरी हो ये ज़रूरी तो नहीं ! कभी कभी दिल का हाल किसी से कहने को बहुत मन करता है लेकिन उस इन्सान को ढ़ूढ़ना इतना आसान भी नहीं होता और उसे बता कर अपने दिल की बात क्या होगा??? क्या दिल हमेशा के लिये हल्का हो जायेगा ??? नहीं कभी नहीं.................... हाँ बिल्कुल भी नहीं ...... मेरे ख़्याल से अपने गम की नुमाइश करना ज़रूरी तो नहीं किसी को दिल का राज़ बताना ज़रूरी तो नहीं ! कभी कभी कुछ लोग अक्सर टोक देते हैं ख़ुद को बड़ा बताकर  छोटों को बीच में रोक देते हैं माना उम्र में तुम हमसे बड़े हो  हम जब घुटनों पर थे तुम अपने पाँव पर खड़े थे लेकिन रिश्तों की बेकद्री तुमने ही शुरू की थी आज घर टूट चुका है  घर के आँगन मे बड़ी सी दीवारें खींची जा चुकी है शायद बच्चों के आने जाने से  ये दीवारें छोटी हो जायें इन दीवारों के पार जाने पर बच्चों को टोकना ज़रूरी तो नहीं .....? हाँ बिल्कुल नहीं ज़रूरी नहीं ! संकल्प साग़र ग़...

शिक्षा ज़रूरी है !

वैशवीकरण के दौर में वैसे तो हर कोई ज्ञानी है किन्तु मुझको दुःख बड़ा है शिक्षा की कीमत सबने नहीं        पहचानी है ! ज्ञान का मतलब क्या है ?? अब कौन ये बतलाता है हर बच्चे का एक ही जवाब है मुझे तो सब कुछ आता है ! गली गली में होड़ लगी है हर गली में दाता है ?? क़िताबो में लिखी बातें अब कौन कहाँ बतलाता है , सबसे ज्ञानी मैं ही हूँ कहने मैं टैक्स थोड़े ही       कट जाता है , ज्ञान का मतलब क्या है अब कौन ये बतलाता है ?? शिक्षा की कीमत नहीं पहचानोगे  तो खुद को कैसे जानोगे, अहम् मैं इतना खोओगे सबसे  पहले रोओगे , मुझे कुछ सीखना है कहने मैं सम्मान  थोड़े ही घट जाता है , ज्ञान का मतलब क्या है अब कौन ये बतलाता है ?? आओ मिलकर कसम खाएं हम सब शिक्षा की कीमत     पहचानेंगे, इस शिक्षक दिवस पर प्रण करें हम अपने शिक्षक के बातें मानेगे , अपने अहम् को तोड़ कर शिक्षा के मूल्य को जानेंगे , शिक्षा पाने के लिए प्रयास करेंगे आज ये हम सब ठानेंगे , गुरु चाहे कैसा भी हो कुछ न कुछ बतलाता है , आपके मुताबिक न हो  लेकिन कुछ तो ...

अब दोस्त सारे खोते जा रहे है !

अब दोस्त सारे खोते जा रहे है सब के सब मतलबी होते जा रहे है ! सोच के दायरे बदलने लगे हैं  अब दोस्त सारे खोते जा रहे है ! दुश्मनी के बीज सब बोते जा रहे हैं ! एक हम थे जो जान देने पर आमादा थे अब अपनी ही गलितयों पर रोते जा रहे हैं ! कौन सच्चा हैं कौन झूठा ये खुदा ही जानता हैं हम तो खुदा की इस इबादत को कंधो पर ढोते जा रहे हैं ! अब दोस्त सारे खोते जा रहे है सब के सब मतलबी होते जा रहे है ! संकल्प साग़र ग़ौर ( बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

प्यार बाक़ी है !

कोई तो गुनाह किया है मैंने जो उसकी निगाहें मुझे गुनहगार मानती है , कुछ तो है तेरे मेरे दरमियान ये बात वो भी जानती है , लेकिन न जाने क्यों नजदीकियां फाँसलो का रूप ले रही है , जिसे मैंने साया समझा था वही मेरे सर की धूप ले रही है , हो सकता है मैं गुनहगार हूँ लेकिन मैंने गुनाह नहीं किया है , तेरी किसी बात को मैंने अनसुना नहीं किया है , हाँ सच और झूठ का दायरा  बहुत बड़ा है मुसीबतों का पहाड़ दोनों के दरमियान खड़ा है , लेकिन एक रास्ता अभी भी इंतज़ार कर रहा है , हर लम्हा अभी भी तुमसे प्यार कर रहा है , माना की मैं निर्दोष नहीं हूँ लेकिन होश में हूँ बेहोश नहीं हूँ , मैं जानता हूँ मेरी बातों पर तुम्हे इकरार नहीं है , तुम अभी भी यही कहोगी की मुझे तुमसे प्यार नहीं है , लेकिन सच यही है की मैं भी हदों कर पार कर रहा हूँ , इतना संजीदा होने की जरूरत नहीं है मैं भी किसी और से प्यार कर रहा हूँ , लेकिन तुम्हारी धड़कनो पर मेरा एतबार बाकी है, मेरे दिल में अभी भी तुम्हारे लिए प्यार बाकी है I प्यार बाकी है ! प्यार बाकी है ! प्यार बाकी है ! प्यार बाक़ी है  ! संकल्प साग़र ग़ौ...

कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिए

कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिये, दिल तो बस एक खिलौना है जमाने के लिये ! हम तो तैयार बैठें है उसे ये बताने के लिए लेकिन वो तैयार ही नहीं है हमारे पास आने के लिए ! हम खुदगर्ज़ नहीं है उसे ये कैसे समझाएं शायद कोई समझदार नहीं है उसे ये समझाने के लिए ! गलती हमारी नहीं फिर भी सर झुका लेते हैं उसकी एक मुस्कराहट पाने के लिए ! हम खुद खड़े रहते हैं रास्तों पर मुसाफिर बनकर उनको जमाने की ठोकर से बचाने के लिए ! घर की जरुरत हैं में जानता हूँ ये मुनासिब हैं अपना नुकसान मत करो चंद सिक्के कमाने के लिए ! कोई साथ नहीं देता उल्फतों के दौर में हम सबसे पहले आएंगे आपको बचाने के लिए ! कौन साथ देता हैं उम्र भर का यहाँ  पर संकल्प लोग एक रिश्ता तोड़ देते हैं दूसरा निभाने के लिए ! कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिये, दिल तो बस एक खिलौना है जमाने के लिये !  संकल्प साग़र ग़ौर (बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता)

एक ख़ामोश रात जैसे कुछ बताना चाहती है !

नीले आसमान तले एक ख़ामोश रात जैसे कुछ बताना चाहती है! ज़िन्दगी के साथ राज नयी जंग न जाने ये दिल की हसरतें क्या पाना चाहती है ? में तेरे पास नहीं हूँ या तू मुझसे दूर है तू भी असहाय हैं दिल मेरा भी मज़बूर हैं ज़िन्दगी न जाने और क्या दिखाना चाहती हैं ! दूर तलक फ़क़त एक हल्की सी रौशनी रात जैसे उसमे नहाना चाहती हैं! एक छोटी सी बच्ची न जाने कब से भूखी है लेकिन आज भी वो अपनी भूख सब से छुपाना चाहती है! एक ख़ामोश रात जैसे कुछ बताना चाहती है !  ये नन्हीं सी चिड़िया बहुत शोर मचातीं हैं भूख ज्यादा हैं वो थोड़ा सा दाना चाहती हैं ! ज़िन्दगी क़िताब के कुछ पन्ने फाड़ देती है शायद वो कुछ पुराने राज़ छुपाना चाहती हैं!  नीले आसमान तले एक ख़ामोश रात जैसे कुछ बताना चाहती है ज़िन्दगी के साथ राज नयी जंग न जाने ये दिल की हसरतें क्या पाना चाहती है ? संकल्प साग़र ग़ौर ( बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )