Skip to main content

कुछ लोग क़िस्मत को आज़माना छोड़ देते है!

कुछ लोग क़िस्मत को आज़माना छोड़ देते है
ये कहकर की हम अकेले है कमाना छोड़ देते है !
कभी कभी लोगों की एक मुराद पूरी नहीं होती
गुस्से में आकर मंदिर जाना छोड़ देते है !
आजकल के बच्चें ग़लतियों को सुधारतें नहीं है
माँ बाप के हिस्सें में अपनी ग़लतियों का हर्ज़ाना छोड़ देते है !
कुछ लोग किसी को यादों को भूल जाने में वक़्त नहीं लगातें
कुछ लोग किसी की याद में खाना छोड़ देते है !
एक हम है संकल्प जो रोज़ ठोकरें खाकर भी जिंदादिल है
वरना लोग तो ज़रा ज़रा सी बातों पर मुस्कुराना छोड़ देते है !
संकल्प साग़र ग़ौर
(बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

Comments

Popular posts from this blog

7. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1. समझ ही नहीं आता तेरी तस्वीर है या दरिया जब भी देखता हूँ बहता चला जाता हूँ ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे ख़्वाब समझ कर अपने से जुदा ना करना अगर रूह में उतर गये तो मर के ही निकलेंगे ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. अश्क़ों के मोती धीरे धीरे पिरोते हैं ये ख़्वाब भी कितने अज़ीब होते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर