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नज़रों से नजरें मिलती रहती है !

नज़रो से नज़रे मिलती रहती है
दिल की कलियाँ रोज खिलती रहती है

हवाएँ आँधियों का रूप ले रही हैं
रोशनी तो रोज सूरज से मिलती रहती है

कोई तो है जो अंधेरो के नुमाइश कर रहा है
लगता है रोशनी अंधेरो को घूरती रहती है

गुनाह करने वालो का वजूद बस इतना है
खुराफात वहाँ भी करते है जहाँ
भगवान की मूर्ति रहती है
संकल्प साग़र ग़ौर
(बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )नज़रों से नजरें मिलती रहती है !

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