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अब दोस्त सारे खोते जा रहे है !

अब दोस्त सारे खोते जा रहे है
सब के सब मतलबी होते जा रहे है !
सोच के दायरे बदलने लगे हैं अब दोस्त सारे खोते जा रहे है !
दुश्मनी के बीज सब बोते जा रहे हैं !
एक हम थे जो जान देने पर आमादा थे
अब अपनी ही गलितयों पर रोते जा रहे हैं !
कौन सच्चा हैं कौन झूठा ये खुदा ही जानता हैं
हम तो खुदा की इस इबादत को कंधो पर ढोते जा रहे हैं !
अब दोस्त सारे खोते जा रहे है
सब के सब मतलबी होते जा रहे है !
संकल्प साग़र ग़ौर
( बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

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