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दिल्ली जल रही है सियासत चल रही है !

दिल्ली जल रही है सियासत चल रही है
बुराई अच्छाई की छाती पर मूँग दल रही है !
किराये के टटटू और भाडे के गुंडे
गोलियाँ कैसे खुले आम चल रही है !
टायरों में आग लगाना और चक्का जाम करना
ऐसी ख्वाइशें सबके दिलों में पल रही है !
कौन पूछे सवाल और कौन माँगे सबूत
सरकार तो सिर्फ ऑंखें मल रही है !
थोड़ा सा गुस्से में हूँ थोड़ा सा ख़ामोश मैं भी हूँ
बैचैनी अजीब सी मेरे दिल में भी चल रही है !
जब आज ये हाल है तो कल कितना बदतर होगा संकल्प
ज़िन्दगी लगता है रोज मौत की तरफ एक एक क़दम बढ़ रही है !
दिल्ली जल रही है सियासत चल रही है   
 बुराई अच्छाई की छाती पर मूँग दल रही है !
संकल्प साग़र ग़ौर
( बनाइयें लफ़्जों से दिल का रिश्ता )

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