भीगी हुई आँखों में एक सैलाब बाकी है
दिन तो ढल गया रात बाकी है !
कहने के लिए कुछ नहीं है
लेकिन फिर भी एक बात बाकी है !
यूँ तो मिलता रहा हूँ बरसो से तुमसे
लेकिन अभी एक अधूरी मुलाकात बाकी है !
तेरी जुस्तजू के सहारे जी तो लूँ
तुझे देने के लिए एक हसरतो का गुलाब बाकी है !
तू मुझमें है में तुझमें हूँ लेकिन नजर नहीं आता
ये तेरा हुनर है या मेरी चालाकी है कुछ तो बाकी है
........................................... कुछ तो बाकी है !
संकल्प साग़र ग़ौर
(बनाइयें लफ़्ज़ों से दिल का रिश्ता )
दिन तो ढल गया रात बाकी है !
कहने के लिए कुछ नहीं है
लेकिन फिर भी एक बात बाकी है !
यूँ तो मिलता रहा हूँ बरसो से तुमसे
लेकिन अभी एक अधूरी मुलाकात बाकी है !
तेरी जुस्तजू के सहारे जी तो लूँ
तुझे देने के लिए एक हसरतो का गुलाब बाकी है !
तू मुझमें है में तुझमें हूँ लेकिन नजर नहीं आता
ये तेरा हुनर है या मेरी चालाकी है कुछ तो बाकी है
........................................... कुछ तो बाकी है !
संकल्प साग़र ग़ौर
(बनाइयें लफ़्ज़ों से दिल का रिश्ता )
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