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5. अंदाज़ ए शायरा ( थोड़ा शायराना हो जाए )

1.
कुछ लोग अपनी
कहानी को ख़ून
से लिखतें हैं
हम शायर हैं
हर अलफ़ाज़ को पूरे
जोश ए ज़ुनून से लिखतें हैं !
# संकल्प साग़र ग़ौर
2.
कुछ लोग पहले मैं
फ़िर तुम और
फ़िर आप हो गए
और फ़िर
आस्तीन में घुस कर
आस्तीन के साँप हो गए !
# संकल्प साग़र ग़ौर
3.
रात के आग़ोश में
खो जाते हैं
वक़्त बेहतरीन हैं
चलो एक दूसरे के हो जाते हैं !
# संकल्प साग़र ग़ौर 

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1. समझ ही नहीं आता तेरी तस्वीर है या दरिया जब भी देखता हूँ बहता चला जाता हूँ ! # संकल्प साग़र ग़ौर 2. मुझे ख़्वाब समझ कर अपने से जुदा ना करना अगर रूह में उतर गये तो मर के ही निकलेंगे ! # संकल्प साग़र ग़ौर 3. अश्क़ों के मोती धीरे धीरे पिरोते हैं ये ख़्वाब भी कितने अज़ीब होते हैं ! # संकल्प साग़र ग़ौर