कोई बदले न बदलें ख़ुद को बदल लेना चाहिए
थोड़ी देर बिना मतलब के भी चल लेना चाहिए !
सूरज की तरह तो हर कोई निकलना चाहता है
रात की तरह भी ढल लेना चाहिए !
मंजिलो को तो हर कोई पाना चाहता है
थोड़ी देर रास्तों पर भी चल लेना चाहिए !
जब ख़ुदा की रेहमत बरसती नहीं है
सुबह उठकर सूरज को जल देना चाहिए !
सुना है वो लहरों पर बैठकर पार जाना चाहता है
उसे समंदर के किनारे घर लेना चाहिए !
जीने की कोशिशें तो सभी करतें हैं
वक़्त मिले तो किसी पर मर लेना चाहिए !
कोई बदले न बदलें ख़ुद को बदल लेना चाहिए
थोड़ी देर बिना मतलब के भी चल लेना चाहिए !
लेख़क
संकल्प साग़र ग़ौर
( बनाइयें लफ़्ज़ों से दिल का रिश्ता )
कोई बदले न बदलें ख़ुद को बदल लेना चाहिए !
Atti sunder
ReplyDelete😍😍😍😍👌👌👌👌
ReplyDeleteOne more fabulous poem
ReplyDeleteSuperb 👌👌
ReplyDeleteWahh bhaiya..loveit from golu
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