अब लोग खुल कर बाहर आते नहीं हैं
अब लोग खुल कर बाहर आतें नहीं हैं
बात कितनी भी संजीदा (गंभीर ) हो बताते नहीं हैं ।
सारी बातें कर लेते है बाहर के लोगों से
घर के लोग उन्हें नजर आते नहीं हैं ।
अपना हिस्सा लेने में लोग जरा भी शर्म नहीं करते
खुद को अगर देना हो तो महीनों तक नजर आते नहीं हैं ।
दूसरों को सब मशवरा (सलाह ) देते है सोच बदलने का
फ़क़त (केवल ) अपनी सोच बदल पातें नहीं हैं ।
लोग बड़ी बड़ी बातें करते है जंग जीतने की
जरा सी सर्दी हो जायें तो रजाई से बहार आतें नहीं हैं ।
माँ बाप सारी दौलत लगा देते है बच्चों की परवरिश में
बच्चें पाई पाई का हिसाब देने में भी हिचकिचातें नहीं हैं ।
दोस्ती निभाने वालो की अब कमी सी लगती है
लेकिन दुश्मनी में लोग कमी दिखातें नहीं हैं ।
जो लोग दूसरों के रास्तें बंद करते है
मंजिलों तक वो भी कभी पहुँच पातें नहीं हैं ।
अब लोग खुल कर बाहर आते नहीं है
बात कितनी भी संजीदा हो बताते नहीं हैं।
लेख़क
संकल्प साग़र गौर
(बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता )
अब लोग खुल कर बाहर आतें नहीं हैं
बात कितनी भी संजीदा (गंभीर ) हो बताते नहीं हैं ।
सारी बातें कर लेते है बाहर के लोगों से
घर के लोग उन्हें नजर आते नहीं हैं ।
अपना हिस्सा लेने में लोग जरा भी शर्म नहीं करते
खुद को अगर देना हो तो महीनों तक नजर आते नहीं हैं ।
दूसरों को सब मशवरा (सलाह ) देते है सोच बदलने का
फ़क़त (केवल ) अपनी सोच बदल पातें नहीं हैं ।
लोग बड़ी बड़ी बातें करते है जंग जीतने की
जरा सी सर्दी हो जायें तो रजाई से बहार आतें नहीं हैं ।
माँ बाप सारी दौलत लगा देते है बच्चों की परवरिश में
बच्चें पाई पाई का हिसाब देने में भी हिचकिचातें नहीं हैं ।
दोस्ती निभाने वालो की अब कमी सी लगती है
लेकिन दुश्मनी में लोग कमी दिखातें नहीं हैं ।
जो लोग दूसरों के रास्तें बंद करते है
मंजिलों तक वो भी कभी पहुँच पातें नहीं हैं ।
अब लोग खुल कर बाहर आते नहीं है
बात कितनी भी संजीदा हो बताते नहीं हैं।
लेख़क
संकल्प साग़र गौर
(बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता )
Fantastic 😇😇
ReplyDeleteWahh
ReplyDelete💯💯💯💯💯💯💯
ReplyDeleteTruth of today's world 😞
ReplyDeleteTruth of today's world 😞
ReplyDeleteBahut khub👌
ReplyDeleteFabulous
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