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दिल के राजो को यूँ छुपाते नहीं है

माना कि दिल के राजो को यूँ छुपाते नहीं है लेकिन
इतना खुल कर भी किसी के सामने आते नहीं है 
सुना है उसे अपनी धड़कनो पर ऐतबार (भरोसा )बहुत है
लेकिन दिल के दरवाजे लोग बेवजह खटखटाते नहीं है 
हालत ये है की मुराद(प्रार्थना ) अगर पूरी न हो
मंदिर में भी लोग फूल चढ़ाते नहीं है 
मोहब्बत में अक्सर निगाहों से बात होती है
फिजूल में लोग होटों को हिलाते नहीं है 
उम्र भर लोग मंजिलो कि राह तकते है
रास्ते किसी को नजर आते नहीं है 
जो दूसरों के घरों में आग लगाते है
सच यही है कि वो कभी चैन से सो पाते नहीं है 
दिल के राजो को यूँ छुपाते नहीं है लेकिन
इतना खुल कर भी किसी के सामने आते नहीं है 
 संकल्प साग़र गौर
(बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता ) 

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