एक सोच
एक सोच.......... सोच रही है ,
एक सोच .......... नोच रही है ,
एक सोच इंतज़ार कर रही है ,
एक सोच प्यार कर रही है ,
एक सोच, सोच को बेकार कर रही है ,
एक सोच हमें समझदार कर रही है ,
एक सोच इंकार कर रही है ,
एक सोच हम पर राज कर रही है ,
एक सोच अटकी हुई है ,
एक सोच भटकी हुई है ,
एक सोच विचारो में है ,
एक सोच विकारो में है ,
एक सोच भ्रम में है ,
एक सोच क्रम में है ,
इस सोच के क्रम को घटाओ मत ,
इस सोच को निचले क्रम पर लाओ मत,
ये सोच महानता की सीढ़ी है
ये सोच आपकी आने वाली पीढ़ी है ।
आपकी सोच बेहतर बने और आप
अपनी सोच से दूसरो को बेहतर बनने के लिए प्रेरित करें ।
अपनी सोच से दूसरो को बेहतर बनने के लिए प्रेरित करें ।
लेखक
संकल्प साग़र गौर
(बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता )
संकल्प साग़र गौर
(बनाइये लफ़्जो से दिल का रिश्ता )
Very nice poem it's really inspiring
ReplyDeleteAppreciated ����������
ReplyDeleteThanks
DeleteAwesome 😇😇
ReplyDeleteThank you for supporting.
DeleteKeep sharing.
incredible �� i enjoyed it��
ReplyDeleteAmazing 💫
ReplyDeleteAmazing sir
ReplyDeleteWahh .... amazing
ReplyDelete🙂🙂🙂👌👌😍😍
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